MP Solar Pump: मध्यप्रदेश की राजनीति और योजनाओं में हमेशा से किसानों का मुद्दा सबसे बड़ा रहा है। गांव का किसान तभी खुश रह सकता है जब उसकी फसल को समय पर पानी मिले, बिजली की दिक्कत न हो और उत्पादन की लागत कम हो। इसी सोच के साथ सरकार अब खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। आपको बता दें कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की है कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता को और बढ़ाया जाएगा, किसानों को सोलर पंप पर 90% तक अनुदान मिलेगा और साथ ही बिना ब्याज का लोन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
सिंचाई क्षमता में होगी 7 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी
कृषि उत्पादन पूरी तरह पानी पर निर्भर करता है। बरसात भरोसे खेती करने वाले किसानों की हालत अक्सर खराब हो जाती है। ऐसे में सिंचाई साधनों का बढ़ना बहुत राहत देता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले कुछ वर्षों में राज्य की सिंचाई क्षमता को 7 लाख हेक्टेयर तक और बढ़ाया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में किसान रबी और खरीफ दोनों मौसम में फसल ले सकेंगे और पैदावार में सीधी बढ़ोतरी होगी।
सोलर पंप पर 90% तक अनुदान
बिजली की समस्या किसानों के लिए हमेशा परेशानी का कारण रही है। खेतों में पंप चलाने के लिए कई बार बिजली रात-रात भर नहीं मिलती। इस समस्या का हल सोलर पंप के रूप में निकाला गया है। अब सरकार ने घोषणा की है कि किसानों को सोलर पंप पर 90% तक का अनुदान दिया जाएगा। यानी किसान को सिर्फ 10% लागत ही वहन करनी होगी। इसके बाद वह सालों तक बिना बिजली बिल और डीजल खर्च के अपने खेत की सिंचाई कर सकेगा।
बिना ब्याज का लोन किसानों के लिए राहत
अक्सर किसान खेती में निवेश करने के लिए महाजन या बैंकों से कर्ज लेते हैं, जिस पर ब्याज का बोझ उन्हें भारी पड़ता है। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए यह भी घोषणा की है कि उन्हें खेती और सिंचाई उपकरणों के लिए बिना ब्याज लोन मिलेगा। इससे किसान अपनी खेती में आधुनिक साधन लगा सकेंगे और उत्पादन लागत कम होगी। खास बात यह है कि ब्याज की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी और किसान केवल मूलधन ही चुकाएंगे।
किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
इन योजनाओं का सीधा असर किसानों की आय पर होगा। पानी की समस्या खत्म होगी तो उत्पादन बढ़ेगा, सोलर पंप से बिजली का खर्च बचेगा और ब्याज-मुक्त लोन से लागत का दबाव नहीं रहेगा। सरकार का दावा है कि इन कदमों से धीरे-धीरे खेती को घाटे के सौदे से निकालकर लाभ का धंधा बनाया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में यह बदलाव न सिर्फ किसानों बल्कि स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित हो सकता है।
किसानों के लिए घोषित ये योजनाएँ केवल कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर उतरें, तभी उनका असली लाभ मिलेगा। अगर सिंचाई क्षमता वास्तव में 7 लाख हेक्टेयर तक बढ़ती है, सोलर पंप किसानों के खेतों तक पहुँचते हैं और बिना ब्याज का लोन समय पर मिलता है, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि एक स्थिर और लाभदायक व्यवसाय साबित हो सकती है।