भोपाल। मध्यप्रदेश अब देश में आयुर्वेद का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रदेश को 180 करोड़ रुपए का अनुदान दिया है, जो अब तक का सबसे बड़ा फंड है। इस राशि का उपयोग न केवल कॉलेज और अस्पताल खोलने में होगा, बल्कि छोटे शहरों से लेकर पर्यटक स्थलों तक आयुर्वेद को बढ़ावा देने में किया जाएगा।
आयुर्वेद कॉलेजों की संख्या दोगुनी हुई
प्रदेश में सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जहां पहले केवल 7 कॉलेज थे, वहीं पिछले 18 महीनों में यह संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। इससे प्रदेश के युवाओं को पढ़ाई और रिसर्च के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी भी काफी हद तक पूरी हो सकेगी।
उज्जैन और खजुराहो में वेलनेस सेंटर
आयुष मंत्रालय की योजना के तहत उज्जैन और खजुराहो जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आयुर्वेद वेलनेस सेंटर खोले जाएंगे। यहां पंचकर्म, आयुर्वेदिक उपचार और योग की सुविधाएं होंगी। खास बात यह है कि इन जगहों पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी आते हैं, जिससे आयुर्वेद टूरिज्म को सीधा बढ़ावा मिलेगा।
छोटे शहरों में भी अस्पताल
आयुष मिशन के अंतर्गत छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी 30 से 50 बेड के अस्पताल खोले जाएंगे। इससे ग्रामीण लोगों को घर के नजदीक ही इलाज की सुविधा मिल पाएगी। अभी तक गांवों के लोगों को बड़े शहरों में जाना पड़ता था, लेकिन अब आयुर्वेदिक इलाज उनके जिले या तहसील स्तर पर ही उपलब्ध होगा।
अनुसंधान और जनजातीय क्षेत्र पर फोकस
मध्यप्रदेश सरकार ने यह भी तय किया है कि जनजातीय इलाकों में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों और पारंपरिक औषधियों पर विशेष रिसर्च कराई जाएगी। इससे न केवल स्थानीय संसाधनों का उपयोग बढ़ेगा बल्कि प्रदेश के लोग रोजगार से भी जुड़ पाएंगे। आने वाले समय में यह रिसर्च आयुर्वेदिक दवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी साबित हो सकती है।
प्रदेश की बड़ी उपलब्धि (MP Ayurveda Hub)
मध्यप्रदेश पूरे देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां आयुर्वेद को इस स्तर पर सरकारी समर्थन मिला है। यहां तेजी से बढ़ते कॉलेज, अस्पताल और वेलनेस सेंटर इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में एमपी वास्तव में देश का आयुर्वेद हब बन जाएगा।