मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है कि अब यह राज्य न सिर्फ कृषि और पर्यटन में बल्कि निर्यात (Export) में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हाल ही में आयोजित ET वर्ल्ड लीडर्स फोरम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने देश के निर्यात में ₹66,000 करोड़ का योगदान दिया है। यह आंकड़ा इस बात का सबूत है कि प्रदेश अब उद्योग और व्यापार की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मध्यप्रदेश का बढ़ता व्यापारिक महत्व
आपको बता दें कि कुछ साल पहले तक मध्यप्रदेश को सिर्फ कृषि प्रधान राज्य माना जाता था। यहां की पहचान गेहूं, सोयाबीन, चना और दलहन जैसी फसलों से होती थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उद्योगों का दायरा बढ़ रहा है, आईटी सेक्टर में कंपनियां आ रही हैं और खासकर मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। इसी का नतीजा है कि अब यहां से हजारों करोड़ का सामान विदेशों में निर्यात किया जा रहा है।
निर्यात से जुड़े प्रमुख सेक्टर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि मध्यप्रदेश से सबसे ज्यादा निर्यात कृषि आधारित उत्पादों, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स और टेक्सटाइल सेक्टर से हो रहा है। खासकर इंदौर, पीथमपुर और भोपाल जैसे औद्योगिक इलाकों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। इन जगहों पर बने उत्पादों की विदेशी बाजारों में अच्छी मांग है, जिससे राज्य की पहचान और मजबूत हुई है।
निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश
मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार निवेश (Investment) को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। सड़कें, हाइवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बेहतर बनाया जा रहा है ताकि उद्योगपतियों को किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार चाहती है कि निवेशक प्रदेश में आएं, यहां के संसाधनों का इस्तेमाल करें और उद्योग लगाएं। इससे न सिर्फ निर्यात बढ़ेगा बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
युवाओं के लिए नए अवसर
निर्यात से जुड़े उद्योगों के बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा युवाओं को मिलने वाला है। इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में पहले ही आईटी और सर्विस सेक्टर तेजी पकड़ रहा है। अब जब निर्यात के लिए नए उद्योग आ रहे हैं तो यहां Data Analyst, अकाउंटिंग, मार्केटिंग और सप्लाई चेन जैसे कामों में भी रोजगार के मौके बनेंगे।
कुल मिलाकर, CM मोहन यादव का यह ऐलान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। ₹66,000 करोड़ का योगदान कोई छोटी बात नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश अब आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में अगर यही रफ्तार बनी रही तो प्रदेश को एक नए औद्योगिक हब के रूप में पहचान मिलेगी।