MP Tourism News: मध्यप्रदेश से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। अक्सर पर्यटन की बात आते ही राजस्थान का नाम सबसे पहले लिया जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदलती नज़र आ रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में कई बड़े प्रोजेक्ट्स की नींव रखी है जिनकी कुल लागत लगभग ₹132 करोड़ है। इसमें ₹52.69 करोड़ का मेमोरियल निर्माण और ₹79.27 करोड़ के अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इन घोषणाओं के बाद साफ है कि राज्य अब टूरिज़्म के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है और देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने की पूरी तैयारी कर चुका है।
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश की खासियत उसकी विविधता में है। यहाँ ऐतिहासिक धरोहरें, धार्मिक स्थल, प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव अभयारण्य और सांस्कृतिक समृद्धि सबकुछ मौजूद है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार ने भी इस मौके को भांपते हुए पर्यटन ढांचे को मज़बूत करने पर खास ध्यान दिया है। सड़कें बेहतर की जा रही हैं, शहरों में नई सुविधाएँ जुड़ रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटकों के लिए बेसिक सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
₹132 करोड़ के इन विकास कार्यों से न केवल पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा बल्कि स्थानीय लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। नए प्रोजेक्ट्स से होटल इंडस्ट्री, ट्रैवल एजेंसियों और गाइड सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय रोजगार (Local Job) के अवसर पैदा होंगे। पर्यटन से जुड़ा हर नया निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने का काम करेगा।
आपको बता दें कि मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में खजुराहो, उज्जैन, भीमबेटका, सांची, कान्हा और बांधवगढ़ नेशनल पार्क जैसे नाम शामिल हैं। इन जगहों पर पहले से ही देश-विदेश से लाखों पर्यटक हर साल पहुँचते हैं। अब नए मेमोरियल और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स जुड़ने से यह संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इसी तरह पर्यटन के ढांचे पर ध्यान देती रही तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है।
पर्यटन को लेकर मुख्यमंत्री ने भी कहा कि यह केवल राज्य की छवि नहीं बदलता, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए नए मौके भी लेकर आता है। राज्य सरकार की योजना है कि हर जिले की अपनी एक खास पहचान बने ताकि पर्यटक केवल बड़े शहरों तक ही सीमित न रहें, बल्कि गाँव और कस्बों तक भी पहुँचें।
यह कहना गलत नहीं होगा कि पर्यटन के मामले में मध्यप्रदेश ने अब राजस्थान जैसी पारंपरिक धरोहर को भी पीछे छोड़ने की क्षमता दिखा दी है। आने वाले समय में इन विकास परियोजनाओं का असर साफ दिखाई देगा और राज्य की पहचान टूरिज़्म कैपिटल के रूप में और मजबूत होगी।